Coal Usage in India | भारत में कोयले का उपयोग

दोस्तों, कोयला एक ऐसा जीवस्म ईंधन जो लाखों वर्षों से पेड़-पौधों के अवशेषों पर गर्मी के प्रभाव और दबाव से निर्मित हुआ। अंटार्कटिक(antarctik) क्षेत्र को छोड़कर दुनिया के लगभग हर भूभाग पर कोयले का भंडार पाया जाता है। यह, आधुनिक युग में हम इन्सानों के लिए किसी वरदान से कम नहीं। हालांकि कोयले से होने वाले प्रदूषण के कारण आज भले ही इसकी उपयोगिता सीमित हो चुकी हो, लेकिन एक वक़्त में यह यातायात, घरेलू ईंधन जैसे कई क्षेत्रों में इसका दबदबा था। भारत में कोयले का उपयोग (coal usage in India) आज भी अहम है, खासकर बिजली उत्पादन में। इसके अलावा दुनिया के कई ऐसे देश हैं जो कोयले का उपयोग पर्याप्त मात्रा में कर रहे हैं। इस पोस्ट में हम, भारत में कोयले के उपयोग (coal usage in India) के साथ-साथ इसके प्रकार, भंडार, उत्पादन और इसके अभाव में होने वाली समस्याओं को जानने का प्रयास करेंगे।

भारत में उपलब्ध कोयले के प्रकार (types of coal available in India)

भारत के अधिकांश कोयला भंडार लगभग 300 मिलियन वर्ष पुराने हैं। यह मुख्यतः दो स्तरसमूहों, गोंडवाना(Gondwanan) और तृतीयक(Tertiary) युग के कोयलों में व्याप्त हैं। इन्हें गुणवत्ता और इनमें मौजूद कार्बन प्रतिशत के आधार पर चार प्रकारों में बांटा गया है-

 1. Coal Usage in India | भारत में कोयले का उपयोग पीट(Peat)
– इसमें कार्बन की मात्रा 40% से कम होती है। यह कोयले के निर्माण के पहले चरण का प्रतिनिधित्व करता है। इसमें नमी और वाष्पशील पदार्थ का उच्च प्रतिशत होता है। जिसके कारण यह लकड़ी जैसा अधिक धुआं, अपेक्षाकृत कम गर्मी देता है और अधिक राख़() छोड़ता है। इसकी कम ताप क्षमता औद्योगिक ईंधन के रूप में इसके मूल्य को कम कर देती है।
 2. Coal Usage in India | भारत में कोयले का उपयोग लिग्नाइट(Lignite)
– आम तौर पर इसे पीट के बाद कोयले के निर्माण का अगला चरण माना जाता है जिसे भूरा कोयला भी कहा जाता है। लिग्नाइट नरम लेकिन पीट की तुलना में अधिक सघन होता है। इसमें कार्बन की मात्रा 40% से 60% तक भिन्न होती है। लिग्नाइट में नमी का प्रतिशत अधिक होता है और ज्वलनशील पदार्थ की मात्रा कम होती है।
 3. Coal Usage in India | भारत में कोयले का उपयोग बिटुमिनस(Bituminous)
– यह कोयले का कठोर और सघन किस्म होता है। इसमें कार्बन की मात्रा लगभग 60% से 80% तक भिन्न होती है। विश्व में कुल कोयला उत्पादन का लगभग 80% बिटुमिनस प्रकार ही है। इसमें नमी और वाष्पशीलता भी कम होती है। इस प्रकार के कोयले को नाविकों के लिए बंकर कोयला भी कहा जाता है।
 4. Coal Usage in India | भारत में कोयले का उपयोग एन्थ्रेसाइट(Anthracite)
– यह सबसे कठोर और सर्वोत्तम गुणवत्ता वाला कोयले का प्रकार है जिसमें कार्बन की मात्रा लगभग 80% से 90% तक भिन्न होती है। यह आसानी से प्रज्वलित नहीं होता है, लेकिन एक बार जलाने के बाद इसकी ताप क्षमता सबसे अधिक होती है। यह लंबे समय तक जलता है और राख भी बहुत कम छोड़ता है। विश्व में कुल कोयले का लगभग 5% ही एन्थ्रेसाइट है। भारत में इस प्रकार का कोयला केवल जम्मू और कश्मीर राज्य में पाया जाता है जिसकी मात्रा काफी कम है।

भारत में कोयले का भंडार (coal reserves in India)

Coal Usage in India
झारखंड, भारत का एक कोयला खदान

भारत के पास दुनिया का चौथा सबसे बड़ा कोयला भंडार है। कोयले के भंडार मुख्य रूप से पूर्वी और दक्षिण-मध्य भारत में पाए जाते हैं। झारखंड, उड़ीसा और छत्तीसगढ़ में भारत के कुल ज्ञात कोयला भंडार का लगभग 70% हिस्सा मौजूद है।

स्तरसमूह के आधार पर भारत में कोयला भंडार वाले राज्य-
 गोंडवाना(Gondwanan)  झारखंड, उड़ीसा, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, बिहार, उत्तर प्रदेश और सिक्किम
 तृतीयक(Tertiary)  मेघालय, असम, नागालैंड और अरुणाचल प्रदेश

भारतीय में कोयला भंडार का एक बड़ा हिस्सा गोंडवाना कोयले से आता है।

भारत में कोयले के उपयोग (coal usage in India) के आधार पर लिग्नाइट() भंडार वाले राज्य-
तमिलनाडु, राजस्थान, गुजरात, पुडुचेरी, जम्मू और कश्मीर, केरल और पश्चिम बंगाल

मार्च 2020 तक, भारत के पास 344 बिलियन (34400 करोड़) मीट्रिक टन संसाधन था। जो अनुमानित 17.5 बिलियन (1750 करोड़) मीट्रिक टन की खोज के साथ, इसके पिछले वर्ष की तुलना में कोयले के ज्ञात भंडार में 5.37% की वृद्धि हुई। इसके अलावा लिग्नाइट कोयले का अनुमानित कुल भंडार 46 बिलियन (4600 करोड़) मीट्रिक टन की खोज के साथ, इसके पिछले वर्ष की तुलना में 0.57% अधिक था।

भारत में कोयले का उत्पादन (coal production in India)

Coal Usage in India

चीन के बाद भारत दुनिया में कोयले का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है। आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2019-20 में कोयले का उत्पादन 730.87 मिलियन (73.09 करोड़) मीट्रिक टन था, जो इसके पिछले वर्ष की तुलना में 0.30% अधिक था। जबकि वर्ष 2018-19 में लिग्नाइट का उत्पादन 42.10 मिलियन (4.21 करोड़) मीट्रिक टन था, जो इसके पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 4.92% कम था। पिछले 10 वर्षों में कोयले और लिग्नाइट का उत्पादन क्रमशः 3.58% और 1.23% की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर से बढ़ा है। इसके साथ ही कोयले की धुलाई कोयला उत्पादन प्रक्रिया का एक अभिन्न अंग है जिसमें खदानों से कच्चे कोयले के राख की मात्रा को हटाने के लिए उसकी ढुलाई की जाती है ताकि इसे बॉयलर्स में डालने के लिए उपयुक्त बनाया जा सके जैसे कि स्टील प्लांट में।

भारत में कोयले का उपयोग

(Coal Usage in India)

पिछली सदी के दौरान, भारत में कोयले का उपयोग (coal usage in India) कई क्षेत्रों में था जैसे- यातायात के लिए रेलगाड़ियों में कोयले के इंजन में, घरेलू ईंधन के में, अधिक ऊष्मा उत्पन्न करने के लिए कोयले का उपयोग इत्यादि। लेकिन तकनीकी के विकास और पर्यावरण सुरक्षा के मद्देनजर कोयले की उपयोगिता सीमित हो गई। भारत में कोयले के उपयोग को यहाँ होने वाले उपभोग के आधार पर देखा जा सकता है।

भारत दुनिया में कोयले के सबसे बड़े उपभोक्ताओं में से एक है। भारत के स्टील एवं वाशरी उद्योग, स्पंज आयरन उद्योग, सीमेंट उद्योग और उर्वरक व रसायन उद्योग कोयले के उपभोग के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्रों में शामिल हैं। देश ने वर्ष 2019–20 में 942.63 मिलियन (94.26 करोड़) मीट्रिक टन कोयले की खपत की, जिसमें से लगभग 73% घरेलू स्तर पर उत्पादित किया गया था। यहाँ पिछले दशक की तुलना में कोयले की खपत 5.28% की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर से बढ़ी है।

कोयले का आयात-

चूंकि भारत में कोयले की उच्च मांग और औसत गुणवत्ता है इसलिए उस कमी को पूरा करने के लिए उच्च गुणवत्ता वाले कोयले का आयात करने के लिए देश के पास अपनी मजबूरी है। यही कारण है कि चीन के बाद भारत कोयले का दूसरा सबसे बड़ा आयातक है। भारत ने वर्ष 2019-20 में 248.54 मिलियन (24.85 करोड़) मीट्रिक टन का आयात किया। भारत का कोयले का शुद्ध आयात पिछले 10 वर्षों में 15.60% की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर से बढ़ा है।

बिजली का उत्पादन-

Coal Usage in India

भारत में कोयला उत्पादन का एक बड़ा हिस्सा बिजली उत्पादन के खपत में जाता है या यूं कहा सकता है कि भारत में कोयले के उपयोग (coal usage in India) में सबसे बड़ा क्षेत्र बिजली उत्पादन का आता है। इसीलिए बिजली क्षेत्र, भारत में कच्चे कोयले का सबसे बड़ा उपभोक्ता है। वर्ष 2019-20 में देश में खपत होने वाले कुल कोयले का लगभग 65% हिस्सा बिजली क्षेत्र से था, वहीं वर्ष 2019-20 में लिग्नाइट की खपत 42.27 मिलियन (4.23 करोड़) मीट्रिक टन रही जिसमें अकेले बिजली उत्पादन में कुल लिग्नाइट खपत का लगभग 86% था। इससे पहले वर्ष 2017-18 में 70%, जिसमें लिग्नाइट का योगदान 3.6% था और वर्ष 2013 में 70% अधिक उत्पादित कोयले का उपभोग किया था।

भारत में कोयले की कमी के कारण और उससे उत्पन्न होने वाली समस्याएँ-

कोयला एक प्रकृतिक भंडार स्रोत है जिसे उपयोग में लाने के लिए वर्षों से निरंतर खनन किया जा रहा है ऐसे में इसकी मात्रा में कमी होना लाज़मी है। और यह केवल भारत ही नहीं बल्कि उन सभी देशों में लागू होता है जहां भी इसका उत्पादन हो रहा है। भारत में कोयले के उपयोग (coal usage in India) के आधार पर कोयले की कमी के कुछ कारण-

उच्च मांग और गुणवत्ता में कमी-

भारत के कोयला भंडार में उपयोग की दृष्टि से आवश्यक कोयलों की मांग अधिक है। दूसरी तरफ ऐसे कोयले जो यहाँ मौजूद हैं उनमें उच्च गुणवत्ता की कमी है या फिर औसत गुणवत्ता है जिनका उपभोग पहले से किया जा चुका है या किया जा रहा है। इसलिए यह कोयले में कमी होने का एक कारण हो सकता है।

ऊर्जा के अन्य नवीकरणीय स्रोतों पर शिफ्ट कर जाना-

चूंकि कोयले से उत्पन्न धुएँ पर्यावरण को काफी नुकसान पहुँचते हैं इसलिए कोयले के उपभोग के लिए बहुत से क्षेत्रों कोयाला उत्पादन को सीमित कर दिया गया है या प्रतिबंधित कर दिया गया है। इसके विकल्प में देश की सरकारों ने ऊर्जा के अन्य नवीकरणीय स्रोतों पर ज़ोर दिया है।

भारत में कोयले की कमी से उत्पन्न होने वाली समस्याएँ-

भारत में कोयला उपयोग (coal usage in India) के लिए उत्पादित कोयले में कमी होने पर कई समस्याएँ पैदा हो सकती हैं जैसे-

विद्युत संकट-

Coal Usage in India | भारत में कोयले का उपयोग

इसका सबसे बड़ा उदाहरण- हाल ही के खबरों में चीन देश की परिस्थितियाँ जहां देश गंभीर बिजली कटौती से जूझ रहा है। इसके अलावा भारत में भी बिजली कटौती की संभावनाओं का अनुमान है। बहुत थर्मल ऊर्जा उद्योगों में खपत के हिसाब से कोयला उत्पादन में कमी आई है। इस तरह कोयले की कमी से विद्युत उत्पादन में कमी आ सकती है जिससे इसकी मांग अधिक होगी और इसका सीधा असर आम लोगों और छोटे-मझोले व्यापारियों पर होगा जिन्हें बिजली भी महंगी मिल सकती है और बिजली कटौती का भी सामना करना पड़ सकता।

उत्पादन से जुड़े आम जन-जीवन पर असर-

भारत में कोयले की कमी से सीधा असर उन क्षेत्रों पर पड़ेगा जहां इसका उत्पादन होता है। इस कमी के कारण वहाँ के खनन उद्योग बंद हो जायेंगे जिसके कारण वहाँ के स्थानीय लोगों के रोजगार पर असर पड़ेगा। इन क्षेत्रों में रह रहे अधिकांश लोगों और उनके परिवारों की जीविका कोयले के खदानों में काम करके ही चलती है।

दोस्तों, भारत में कोयला उपयोग (coal usage in India) से संबधित यह पोस्ट पढ़ने के लिए आपका धन्यवाद! उम्मीद है की इससे आपको काफी जानकारी प्राप्त हुई हो। पोस्ट पसंद आए तो इसे शेयर करें। और ऐसी ही जानकारियों के लिए आपके अपने ब्लॉग hindimain.co.in को सबस्क्राइब करें।  

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